प्रिय पाठकगण,
मैं, योगेंद्र नाथ “योगी,” आप सभी के अपार प्रेम और समर्थन के लिए हृदय से आभार प्रकट करता हूं। एक अधिवक्ता के रूप में कार्यरत रहते हुए, ईश्वर द्वारा दी गई इस अनमोल कलम का उपयोग कर, मैंने अपने विचारों और भावनाओं को कविताओं के रूप में आप तक पहुंचाने का प्रयास किया है। मेरी रचनाओं में प्रकृति की सुंदरता, देशभक्ति, प्रेम, रिश्तों की जटिलताएं, और समाज की विभिन्न वास्तविकताएं दर्शाई गई हैं।
आपके स्नेह और विश्वास ने मुझे सृजन की इस यात्रा में आत्मविश्वास और प्रेरणा दी है। मैं कोई विशिष्ट कवि नहीं, बल्कि एक साधारण इंसान हूं, जो हिंदी भाषा की सरलता के साथ अपने विचार व्यक्त करता है। मेरी हर रचना उस ईश्वर की कृपा है, जिसके बिना मैं कुछ भी नहीं हूं।
अपनी पुस्तकों को आपके समक्ष प्रस्तुत करते हुए, मैं आपकी प्रतिक्रियाओं और आशीर्वाद की प्रतीक्षा करता हूं। आशा है कि आप अपना प्रेम और समर्थन इसी तरह बनाए रखेंगे।
सादर,
योगेंद्र नाथ “योगी”